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मानव तस्करी में प्रभावी कदम उठाए पुलिस

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PUBLISHED IN AMAR UJALA
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पुलिस लाइन में स्वयंसेवी संगठन शक्ति वाहिनी ने शनिवार को बाल अपराध और मानव तस्करी के मामलों में प्रभावी कदम उठाने पर जोर दिया। देह व्यापार में धकेली जाने वाली युवतियों की काउंसलिंग कर उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ने को कहा। कार्यशाला का शुभारंभ आईजी जोन डीसी मिश्रा ने किया।

कार्यशाला में आईजी मिश्रा ने प्रदेश सरकार के मानव तस्करी रोकने को उठाए गए कदमों की जानकारी दी। उन्होंने बच्चों के यौन शोषण, बाल विवाह, बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी, बच्चों की गुमशुदगी, मानव तस्करी और मानव अंगों की तस्करी, वेश्यावृत्ति आदि बिंदुओं पर सिलसिलेवार प्रकाश डाला।

शक्ति वाहिनी के अध्यक्ष एवं सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता रविकांत ने वर्कशाप में मौजूद बाल कल्याण अधिकारियों को जानकारी दी कि यदि कोई बच्चा घर से भटककर पुलिस के पास पहुंचे तो उसे तो बाल कल्याण समिति के सामने पेश करें। बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार होना चाहिए। बच्चे को उसके अभिभावकों तक पहुंचाने के लिए बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले स्वयंसेवी संगठनों की मदद लें। आन लाइन मिसिंग चाइल्ड वेबसाइट पर भी ऐसे बच्चों का डाटा अपलोड किया जा सकता है।

उन्होंने मानव तस्करी को गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि रेड लाइट एरिया में बंधक युवतियों को मुक्त कराए जाने के बाद उनकी काउंसलिंग की जरूरत है। कुछ दिनों पहले आगरा के खंदौली में एक किशोरी को उसके रिश्तेदार ने ही बेच दिया था। ऐसे मामलों में उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना जरूरी है। वेश्याओं के साथ पुलिस दुर्व्यवहार करती है। ऐसा नहीं होना चाहिए। पास्को एक्ट और महिलाओं संबंधी नए कानूनों की जानकारी भी दी गई।

वर्कशाप में डाक्यूमेंट्री भी दिखाई गई। इसमें एक रेड लाइड एरिया से मुक्त कराई गई लड़कियों के साथ पुलिसकर्मियों को गालीगलौज करते हुए दिखाया गया है। कार्यशाला में एसपी प्रोटोकॉल अशोक त्रिपाठी, एसपी सिटी राजेश कुमार सिंह, एसपी क्राइम, एसपीआरए बबीता साहू, सीओज, स्वयंसेवी संगठन और बाल अधिकार संगठनों के पदाधिकारियों के अलावा थानों में तैनात बाल कल्याण अधिकारी शामिल रहे।

एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल में सिर्फ दो पुलिसकर्मी
जनपद में मानव तस्करी रोकने को एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल का गठन वर्ष 2010 में किया गया था। लेकिन सेल में पुलिसकर्मी ही नहीं है। काफी समय से एक दरोगा और एक पुलिसकर्मी ही सेल का काम देख रहे हैं। सेल ने आज तक मानव तस्करी पकड़ने का काम नहीं किया।

रेड लाइट एरिया में बेची जाती हैं युवतियां
शहर में कश्मीरी बाजार, सेब का बाजार के कोठों पर बंगाल, बिहार और नेपाल की लड़कियों को बेचा जाता है। दिल्ली का एक स्वयंसेवी संगठन अभी तक दो दर्जन से अधिक लड़कियों को पुलिस की मदद से इन कोठों से मुक्त करा चुका है। लेकिन पुलिस को अपने इलाके में चलने वाले इन कोठों के बारे में जानकारी ही नहीं होती है।

 

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