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मानव तस्करी के खिलाफ खड़ी हुई शक्ति वाहिनी

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PUBLISHED IN DAINIK JAGRAN

जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी:

मानव तस्करी अपने आप में एक जघन्य अपराध है। किंतु आज भी मानव तस्करी धड़ल्ले से की जाती है। कभी विवाह का प्रलोभन देकर तो कभी नौकरी देने के बहाने तस्करी की जाती है। खासकर बच्चों और महिलाआंे की तस्करी की जाती है। ऐसे में एक संस्था आगे आई जिसे शक्तिवाहिनी के नाम से जाना जाता है। इसकी स्थापना सर्वप्रथम दिल्ली में वर्ष 2001 में हुई थी। तीन भाइयों ने मिलकर इसकी स्थापना की थी।

जिसमें रविकांत इसके अध्यक्ष है। निशीकांत एक कार्यकर्ता और ऋषिकांत एक एक्जेक्यूटिव डायरेक्टर है। इसी कड़ी के तहत वर्ष जुलाई वर्ष 2011 में शहर में भी शक्तिवाहिनी नामक संस्था की स्थापना की गई। जिसका प्रमुख उद्देश्य था यहां से तस्करी की गई महिलाओं को मुक्त कराना। इस संबंध में संस्था से जुड़े निशिकांत का कहना है कि इन तीन वषरे में पूरे देश से आठ सौ महिलाआंे और बच्चों को तस्करों के चंगुल से छुड़वाया गया। जिसमें तीन सौ पचास महिलाएं बंगाल से हैं। जिसमें चालीस प्रतिशत बच्चियां है। इसी कड़ी के तहत रविकांत कहते हैं कि इस शहर सहित छह जिलों में संस्था द्वारा कार्यालय बनाने की जरूरत महसूस तब की गई। जब हम देखते थे कि अक्सर तस्करी की गई महिलाएं इस राज्य से जुड़ी होती थी।

खासकर पहाड़ी और चाय बागान इलाके की होती थी। ऐसे में हमलोगों ने निर्णय लिया कि जब यहीं से तस्करी की जाती है तो यहीं पर कार्यालय की स्थापना की जानी चाहिए। ताकि प्रकार की तस्करी को रोका जा सके। इस बारे में यहां के लोगों बताया जाए। 1संस्था से जुड़े दीप बनर्जी कहते हैं जागरूकता अभियान चलाने के लिए लिए ग्रुप बनाए गए है जो विभिन्न स्थानों पर जागरूकता अभियान चलाते हैं।

दार्जिलिंग जिले में पांच ग्रुप बनाए गए है। जो सुदूर ग्रामीण इलाकों में जाकर वहां के पंचायत प्रधान, अध्यापिकाएं सहित महिलाओं को लेकर बातचीत करते हैं। उन्हें समझाया जाता है कि वे शादी और नौकरी इत्यादि का झांसा देने वालों के चक्कर में ना आए। पुरी जांच पड़ताल करे। इसके साथ ही स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। 1जलपाईगुड़ी हाई स्कूल, मारवाड़ी हाई स्कूल, कालियांगज गल्र्स हाई स्कूल, सिलीगुड़ी देशबंधु उच्च बालिका विद्यालय, शक्तिगढ़ बालिका विद्यालय, बाल्मिकी विद्यापीठ, एक्तिसियाल स्कूल, घुघुमाली हाई स्कूल, अठारखाई उच्च बालिका विद्यालय, इलापाल चौधरी हिंदी हाई स्कूल सहित अन्य स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों को बताया गया है कि वे किसी प्रकार प्रलोभन में ना आए। अपने आसपास के लोगों को भी इस बारे में बताए कि इस प्रकार का गिरोह सक्रिय है।

इस मौके पर विद्यार्थियों को इस मुद्दे से जुड़ी फिल्म भी दिखाई जाती है। किस प्रकार से एक छात्र की सूझबूझ से एक लड़की की तस्करी होने से बच जाती है। हाल ही में अनुपमा खोजे नामक नाटक जक्शंन, एनजेपी, माटीगाड़ा, कोर्ट मोड़ सहित शहर के मुख्य इलाकों और सड़कों पर खेला गया। जिसमें दिखाया गया कि किस प्रकार की मीठी बातें कर फंसाया जाता है। जो इस प्रकार की बातें करे उनसे सावधान रहे। जिसमें अंकूर नाट्य गोष्ठी की सक्रिय भूमिका रही। इसके अलावा कन्याश्री योजना के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है। जिसमें 13 से 18 वर्ष तक की कन्या इसका लाभ उठा सकती है। इसके अलावा बच्चियों को कक्षा आठ में इनरोल होना चाहिए। इस योजना के बारे में बताने का मुख्य लक्ष्य है कि इससे बाल विवाह पर रोक लगती है। बच्चियों को पढ़ने का अवसर मिलता है। इसके अलावा हर थाने में पैंपलेट बांटे गए हैं। हेल्पलाइन नंबर दिया गया है।नुक्कड़ नाटक के माध्यम से मानव तस्करी के प्रति बच्चों को जागरूक करते शक्तिवाहिनी के सदस्य।जागरण

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