No comments yet

ह्यूमन ट्रैफिकिंग : पीड़ितों को नहीं मिला मुआवजा

traffickingराहुल मानव, नई दिल्ली

ह्यूमन ट्रैफिकिंग के मामलों में पीड़ितों को कोर्ट के डिसिजन के बाद भी मुआवजा नहीं मिल पा रहा है। सरकार की तरफ से शुरू की गई विक्टिम काम्पन्सेशन स्कीम के तहत देश के कई राज्यों में 2009 में सेक्शन 357-ए, सीआरपीसी अमेंडमेंट के जरिए लागू किया गया था। एक एनजीओ का आरोप है कि दिल्ली इस तरह के मामले सिर्फ कागजों पर ही सीमित हैं। एनजीओ शक्ति वाहिनी के अनुसार, कोर्ट के फैसले के बाद दिल्ली स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी की तरफ से मुआवजे की रकम देने की प्रक्रिया शुरू की जाती है। एनजीओ का आरोप है कि लंबे अरसे से अथॉरिटी ने यह प्रक्रिया शुरू नहीं की है। दिल्ली स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के अडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन और ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी सुरेंदर एस. राठी एनजीओ के आरोपों को खारिज करते हुए कहते हैं कि अथॉरिटी ने कई मामले 2 से 3 दिनों में सुलझा दिए हैं और पीड़ितों को मुआवजा भी दिया जा रहा है। इस तरह के आरोप बेबुनियाद हैं कि पुलिस की तरफ से ऐसे पीड़ितों को पेश किया जाता है तभी अथॉरिटी मुआवजे देती है।

शक्ति वाहिनी एनजीओ के अध्यक्ष रविकांत बताते हैं कि ह्यूमन ट्रैफिकिंग से जुड़े कुछ केसेज में कोर्ट के फैसले के बाद भी मुआवजे की रकम नहीं दी गई है। 30 जुलाई को इंटरनैशनल ह्यूमन ट्रैफिकिंग डे के मौके पर एनजीओ कॉलेज में जाकर स्टूडेंट्स को इसके बारे में अवेयर करेगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद दिल्ली सरकार के विक्टिम काम्पन्सेशन स्कीम-2012 के तहत जारी नोटिफिकेशन में ह्यूमन ट्रैफिकिंग, बाल उत्पीड़न और किडनैपिंग से जुड़े मामलों में 50 हजार रुपये का मुआवजा देने का प्रावधान है।

केस स्टडी 1

17 साल की सुफिया (बदला हुआ नाम) को जीबी रोड के एक कोठे में वेश्यावृति के लिए मजबूर किया गया था। अप्रैल 2014 में कावेरी बावेजा की अदालत ने पीड़ित लड़की को मुआवजा देने का फैसला सुनाया था। एनजीओ का आरोप है कि अभी तक मुआवजे की रकम पीड़ित तक नहीं पहुंचाई गई है।

केस स्टडी-2

एक केस में शिवानी नाम की पीड़ित लड़की को रेखा और शीतल देह व्यापार में धकेलने के लिए जबर्दस्ती कर रही थीं। इन दोनों ही आरोपी को कोर्ट ने 10 साल की सजा सुना दी है। तीस हजारी कोर्ट के एडिशनल सेशन जज ने आरोपियों को सजा सुनाते हुए इसी साल अप्रैल महीने में पीड़ित को मुआवजा देने का भी फैसला सुनाया था।

केस स्टडी -3

आरती और दिव्या ( बदला हुआ नाम ) ऐसी दो पीड़ित हैं , जिनके केस में आरोपियों को दोषी करार दिया जा चुका है। कोर्ट ने इसी दौरान पीड़ित को मुआवजा देने का फैसला सुनाया था। एनजीओ का आरोप है कि कोर्ट के फैसले को 10 महीने हो गए लेकिन अभी भी पीड़ित को मुआवजा नहीं मिला है। यहां तक की पीड़ित को मुआवजे की कोई जानकारी नहीं है।

Post a comment

Shakti Vahini's COVID-19 Response Work

X
%d bloggers like this: