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सितंबर में गायब हुए 213 बच्चे

NAVBHARAT TIMES

दिल्ली में बच्चों के लापता होने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। एक एनजीओ की स्टडी में सामने आया है कि सितंबर में ही बच्चों के लापता होने के मामले करीब 30 पर्सेंट तक बढ़े हैं। एनजीओ की स्टडी में सामने आया है कि सितंबर 2014 में 213 बच्चे राजधानी से लापता हुए हैं। बच्चों को गायब करने वाले कई रैकेट शहर में एक्टिव हैं। इसी साल दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट में भी बताया गया था कि जनवरी से अगस्त 2014 के बीच 3,391 बच्चे गायब हुए हैं।

बचपन बचाओ आंदोलन के चेयरपर्सन आर. एस. चौरसिया बताते हैं कि स्टडी में सामने आया है कि सितंबर 2014 में 213 बच्चे दिल्ली से गायब हुए। राजधानी से हर रोज 7 से 8 बच्चे, तो देश से 17 से 18 बच्चे लापता होते हैं। पैरेंट्स की लापरवाही और लोगों के एक्टिव न होने की वजह से भी ऐसे मामले बढ़ रहे हैं। पुलिस के साथ-साथ लोगों को भी अलर्ट रहने की जरूरत है। पब्लिक को भी ऐसे लोगों पर नजर रखने की जरूरत है, जिनके साथ बच्चा मन से नहीं जा रहा हो।

बच्चों के लापता होने के पीछे कई रैकेट काम कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी भी पिकनिक स्पॉट पर अगर बच्चा पैरेंट्स के साथ है, तो उन्हें खासतौर पर बच्चे पर नजर रखनी चाहिए क्योंकि ऐसी जगहों पर बदमाश आपकी नजर हटने का ही इंतजार कर रहे होते हैं और बच्चे को बहला-फुसलाकर अगवा कर लेते हैं। ये लोग बच्चों से मजदूरी करवाते हैं। लड़कियों को देह व्यापार, शादी के लिए और बेचने के लिए भी अगवा किया जाता है।

शक्ति वाहिनी एनजीओ के प्रवक्ता ऋषिकांत कहते हैं कि इंडिया गेट, आईएसबीटी बस टर्मिनल, कश्मीरी गेट, सराय काले खां रेलवे स्टेशन, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, आनंद विहार स्टेशन जैसे स्पॉट से सबसे ज्यादा बच्चे लापता होते हैं। इस रोकने के लिए पैरेंट्स और लोगों की भी उतनी ही जिम्मेदारी है जितनी पुलिस की।

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