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दिल्ली में ऐसे नरक बन जाती है झारखंडी बेटियों की जिंदगी

नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और एनजीओ शक्तिवाहिनी के संयुक्त अभियान में हाल ही में देश की राजधानी से घरों पर काम करने वाली 12 नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया गया है। इनमें से 11 लड़कियां झारखंड की हैं। ‘भास्कर’ के साथ बातचीत में इन लड़कियों ने अपने कटु अनुभव को साझा किया। इन्होंने बताया कि दिन में कई घंटे तक काम लेने के बावजूद उनके मालिकों ने वेतन के नाम पर एक पैसा भी नहीं दिया है। मुक्त कराई गई लड़कियों में से कुछ अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी कर भविष्य को बेहतर बनाने की उम्मीद संजोए हैं। ये सभी लड़कियां दिल्ली सरकार के शेल्टर होम ‘निर्मल छाया’ में परिजनों का बाट जोह रही हैं। मुक्त कराई गई झारखंड की 11 लड़कियां गुमला, सिमडेगा, खूंटी और रांची जिले से हैं। सेक्टर-7 से छुड़ाई गई तोरपा, रांची की नेहा बताती हैं कि वह पांच-भाई बहनों में सबसे बड़ी है। छठी कक्षा तक पढ़ाई के बाद बीमार पिता के इलाज की जिम्मेदारी आ गई। जिसके कारण वह एक महिला के साथ काम करने दिल्ली आ गई। यहां दो साल तक घरेलू कामकाज करने के बाद भी मालिक ने एक भी पैसा नहीं दिया।

नेहा ने बताया कि मजबूरियों के कारण वह घरों में काम करके परिवार की मदद करना चाह रही थी। लेकिन यहां आने के बाद जैसा सलूक हुआ उसके बाद वह कभी नहीं चाहेगी कि ‘मेड’ के रूप में काम करे। उसने बताया, जब मालिक से पैसे की बात करती, तो वह कहता कि तुम्हारा पैसा हमने प्लेसमेंट एजेंसी वाले को दे दिया है। जब एजेंसी से बात करते तो उनका जवाब होता था कि साल पूरा होने पर पैसा मिलेगा। आज तक मुझे एक रुपया भी नहीं मिला।’ गुमला की इतवा टोप्पो की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। आठवीं तक पढ़ी इतवा गांव के चर्च की सिस्टर के जरिए सबसे पहले लखनऊ पहुंची। वहां पर एक हॉस्पिटल में कुछ माह काम किया। बाद में उसे गुडग़ांव के एक घर में काम पर लगा दिया। वहां दो साल काम करने के बाद वह एक प्लेसमेंट एजेंसी के संपर्क में आई जिसे गुमला का ही एक व्यक्ति चला रहा था। इस शख्स ने इतवा को पीतमपुरा के एक घर में झाड़ू-पोंछे के काम में लगा दिया। दिल्ली में बेतहाशा काम लिए जाने और प्रताडऩा सहने के बाद इतवा अब जल्द से जल्द अपने परिवार वालों से मिलना चाहती है।

(लड़कियों के नाम बदल दिए गए हैं।)

Comment(1)

  1. Reply
    सिमोन सेम लकडा says

    कब हम और ह्मारी सरकार जागेगी.. सरकार की उदासिनता और ह्मारी भुख व मजदुरी, क्या यही सब देखने को हमारा झारखण्ड बना था, हमे तो, हमारे लोग ही लुट रहे है.. लानत है ये पन्गु सरकार के जो हम गरीबो को ना रोज़गार और न ही दो जुन कि रोटी दे पा रही है…

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